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हमारी बॉडी का स्ट्रक्चर, बीमारियों के अटैक और हमारी रेसिस्टेंट पॉवर यह सब हमारी विल पॉवर पर डिपेंड करते हैं। यह विल पॉवर हमारे विचारों में ही जन्म लेता है, वहीं विकसित होता है। हमारे सोचने का एटिट्यूड हमारे शरीर में ऐसे केमिकल उत्पन्न करता है जो हमारी हेल्थ के लिए पूरी तरह रिस्पॉन्सिबल होते हैं। कैंसर जैसे रोग से भी इसी विल पॉवर से छुटकारा पाया जा सकता है।
हमारी विचारधारा किस हद तक बीमारियों से जूझ सकती है, इस बारे में कार्ल सिमोंटोन नामक साइंटिस्ट ने सोच का एक इमेजिनेशन पिक्चर प्रस्तुत किया है और स्टडी के बाद उसके रिजल्ट से भी वैज्ञानिकों को अवगत कराया है। सिमोंटोन के अनुसार आप अपनी आँखें बंद कीजिए, टेंशन फ्री हो जाइए और इमेजिन कीजिए कि आप एक मजबूत दीवारों वाले किले के सुंदर बड़े हरे-भरे मैदान में लेटे हैं। इस विशाल किले के पार्क के हर दरवाजे पर सैनिक तैनात हैं।
सफेद बड़े ट्रैनी कुत्ते हिफाजत के लिए इधर-उधर घूमते हुए आपकी सिक्योरिटी को दूर-दूर तक सूँघ रहे हैं। अचानक उन सिक्योरिटी डॉग में से कोई एक, घुसपैठिए को पहचान लेता है, जो कि भीतर घुसने की कोशिश कर रहा है। कुत्तों की सारी फौज उस पर टूट पड़ती है।
वह घुसपैठिया भागने की कोशिश कर रहा है कि अचानक सिक्योरिटी सैनिक की गोली से वह घायल हो जाता है। चुस्त कुत्ते उसके चिथड़े कर डालते हैं और जब हड्डियों के अलावा शेष कुछ नहीं रहता शेष कुछ नहीं रहता है तो मुँह में हड्डियाँ दबाकर वे पार्क से बाहर चले जाते हैं।
हमारी विचारधारा किस हद तक बीमारियों से जूझ सकती है, इस बारे में कार्ल सिमोंटोन नामक साइंटिस्ट ने सोच का एक इमेजिनेशन पिक्चर प्रस्तुत किया है और स्टडी के बाद उसके रिजल्ट से भी वैज्ञानिकों को अवगत कराया है। सिमोंटोन के अनुसार आप अपनी आँखें बंद कीजिए, टेंशन फ्री हो जाइए और इमेजिन कीजिए कि आप एक मजबूत दीवारों वाले किले के सुंदर बड़े हरे-भरे मैदान में लेटे हैं। इस विशाल किले के पार्क के हर दरवाजे पर सैनिक तैनात हैं।
सफेद बड़े ट्रैनी कुत्ते हिफाजत के लिए इधर-उधर घूमते हुए आपकी सिक्योरिटी को दूर-दूर तक सूँघ रहे हैं। अचानक उन सिक्योरिटी डॉग में से कोई एक, घुसपैठिए को पहचान लेता है, जो कि भीतर घुसने की कोशिश कर रहा है। कुत्तों की सारी फौज उस पर टूट पड़ती है।
वह घुसपैठिया भागने की कोशिश कर रहा है कि अचानक सिक्योरिटी सैनिक की गोली से वह घायल हो जाता है। चुस्त कुत्ते उसके चिथड़े कर डालते हैं और जब हड्डियों के अलावा शेष कुछ नहीं रहता शेष कुछ नहीं रहता है तो मुँह में हड्डियाँ दबाकर वे पार्क से बाहर चले जाते हैं।
सिमोंटोन के अनुसार जब इस प्रकार की पॉजिटिव सोच सीरियस पैशेंट में डेवलेप की गई तो इस सोच के बड़े ही चमत्कारी प्रभाव हुए। पहले तो सिमोंटोन के इस एक्सपिरिमेंट को वैज्ञानिकों ने गंभीरता से न लेकर इसे महज एक संयोग भर माना मगर, निरंतर उसके सक्सेसफुल रिजल्ट ने अंततः वैज्ञानिकों को आकर्षित कर ही लिया।
कई डॉक्टरों ने सिमोंटोन के डायरेक्शन व ट्रेनिंग में लगभग एक दर्जन कैंसर के गंभीर रोगियों का उपचार किया और उन्हें दुबारा निरोग जीवन प्रदान किया। हाँ, यह बात अवश्य है कि कुछ डॉक्टरों की यह भी मान्यता थी कि केवल सिमोंटोन की सोच चिकित्सा ही नहीं बल्कि साथ-साथ चल रहे उपचार के प्रभाव को भी न नकारा जाए।
सिमोंटोन ने बताया कि ऐसे रोगियों को जिन्हें अन्य डॉक्टरों ने एक वर्ष से अधिक जीवन असंभव बताया था, उन्हें बीस वर्ष तक जीवित देखा। इसका कारण उनकी स्ट्रॉन्ग विल पॉवर थी, जिससे बीमार मनुष्य ने अपनी उम्र पर विजय प्राप्त की।
हमारे विचार व कल्पनाएँ हमारे शरीर की बायलॉजिकल केमिकल प्रोसेस को एक्टिव बनाती हैं और इन एक्टिव वेरिएबल्स के माध्यम से ही संदेश मस्तिष्क सेल तक पहुँचते हैं, जहाँ से यह पूरे शरीर में फैलकर उसे एक इफेक्टिव मेडिकल क्वॉलिटी प्रदान करते हैं।
जहाँ एक ओर कुछ डॉक्टर इस नए रिसर्च को लोकप्रिय बनाने में जुटे हैं वहीं दूसरी ओर अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन ने इस थेरेपी का विरोध भी किया। अमेरिका में इन थेरेपी को एडवांस समझा जा रहा है और पीएनआई अर्थात साइको न्यूरो इम्यूनोलॉजी बिहेवियर ट्रीटमेंट तथा न्यूरो इम्यूनो मोडयूलेशन नाम से जाना जाता है।
सिमोंटोन ने बताया है कि ब्रैन केमिकल्स न केवल इम्यून सिस्टम को कंट्रोल करता है बल्कि इम्यून सिस्टम से कम्यूनिकेशन भी रखने की क्षमता रखता है। ये केमिकल मैसेज पूरे शरीर को बैक्टीरिया, वायरस और ट्यूमर्स के संबंध में पूरी इन्फॉर्मेशन देते हैं।
इन्फेक्शन के दौरान इम्यून सेल्स न केवल बैक्टीरिया से लड़ती हैं बल्कि ब्रैन की तरह ही हार्टबीट और बॉडी टेम्प्रैचर को कंट्रोल करती हैं। यह इम्यून सेल्स (प्रतिरक्षा कोशिकाएँ) ब्रैन के इमोशन्स और कॉन्शियस के सेंटर से भी बतियाती हैं और उन्हें यह समझाती है कि बीमारी के दौरान क्यों रोगी परेशान हो जाता है, उसकी मैंटल कंडीशन क्यों विकृत होती है और रोग से लड़ने की शक्ति क्यों कम हो जाती है। सिमोंटोन का यह विचार वैज्ञानिक क्षेत्रों में गंभीरता से लिया जा रहा है व इस विषय पर अच्छी खासी बहस की जा रही है।
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* पाचन शक्ति ठीक रखनी हो तो ठीक वक्त पर भोजन करें और प्रत्येक कौर को 32 बार चबाएँ।
* यदि यौनशक्ति ठीक रखनी हो तो कामुक चिंतन न किया करें और सप्ताह में एक से अधिक बार सहवास न किया करें।
* यह गलतफहमी है कि अण्डा, माँस खाने से बल बढ़ता है और शराब पीने से आनंद आता है। अण्डा, माँस खाने से शरीर मोटा-तगड़ा जरूर हो सकता है पर कुछ बीमारियाँ भी इसी से पैदा होती हैं। शराब पीने से आनंद नहीं आता, बेहोशी आती है और बीमारियाँ होती हैं।
* अपनी आर्थिक शक्ति से अधिक धन खर्च करने वाला कर्जदार हो जाता है। अपनी शारीरिक शक्ति से अधिक श्रम करने वाला कमजोर हो जाता है। अपनी क्षमता से अधिक विषय भोग करने वाला जल्दी बूढ़ा और नपुंसक हो जाता है और अपने से अधिक बलवान से शत्रुता करने वाला नष्ट हो जाता है।
* यदि आप मुफ्त में स्वस्थ और चुस्त बने रहना चाहते हैं तो आपको तीन काम करना चाहिए। पहला तो प्रातः जल्दी उठकर वायु सेवन के लिए लम्बी सैर के लिए जाना और दूसरा ठीक वक्त पर खूब अच्छी तरह चबा-चबाकर खाना तथा तीसरा दोनों वक्त शौच अवश्य जाना।
* बीमारी की अवस्था में, बीमारी से मुक्त होने के बाद, भोजन करने के बाद, परिश्रम या यात्रा से थके होने पर प्रातःकाल तथा सूर्यास्त के समय और उपवास करते समय विषय भोग करना बहुत हानिकारक होता है।
* यदि आप सुख चाहते हैं तो दुःख देने वाला काम न करें, यदि आप आनंद चाहते हैं तो स्वास्थ्य की रक्षा करें। यदि आप स्वास्थ्य चाहते हैं तो व्यायाम और पथ्य का सेवन करें। संसार के सब सुख स्वस्थ व्यक्ति ही भोग सकता है। कहा भी गया है- पहला सुख निरोगी काया।
* सूर्योदय से पहले उठें, घूमने जाएँ, हल्का व्यायाम या योग करें।
* प्रातःकाल व सोते समय 15 मिनट ईश्वर का ध्यान करें।
* स्वयं को जानें, अपनी प्रतिभा, क्षमता व सीमाओं को पहचानें।
* हमेशा सकारात्मक चिंतन करें। नकारात्मक सोच से ऊर्जा नष्ट होती है।
* जो है, उस पर संतोष करें व कर्म करने में पूर्ण विश्वास रखें।
* उत्साह एवं आत्मविश्वास के साथ काम करें। व्यवस्थित दिनचर्या की आदत डालें।
* सदैव वर्तमान में जीएँ, भूत व भविष्य की व्यर्थ चिंता से बचें। सदैव प्रसन्नचित्त रहें। हँसते-हँसते जीना सीखें।
* सादा व सरल जीवन जीएँ। जीवन में गुणवत्ता पर विश्वास रखें। दिखावे से बचें।
* हॉबीज विकसित करें। समय की पाबंदी का खयाल रखें। हमेशा वाणी संयम रखें। धैर्य व आत्मनियंत्रण रखें। परिवार के साथ छुट्टियाँ मनाएँ।
* अच्छा स्वास्थ्य ही जीवन के लिए श्रेष्ठ धन है। दूसरों से स्वयं की तुलना करने से बचें। कम तथा सच्चे मित्र बनाएँ।
इन बातों को जीवन में शामिल करने, व्यवहार में लाने में शुरू में परेशानी हो सकती है, परंतु कुछ समय बाद आप महसूस करेंगे कि आप तनावरहित एवं संतोषप्रद जीवन जी रहे हैं।
गुलाब : यूँ तो गुलाब त्वचा का सौन्दर्य निखारने में सदियों से माहिर है। गुलाब के फूलों की पत्तियाँ त्वचा को पोषण देती हैं, त्वचा के रोम-रोम को सुगंधित बनाती हैं, ठंडक प्रदान करती हैं। गुलाब के 2 फूलों को पीसकर, आधा प्याले कच्चे दूध में 30 मिनट तक भिगोएँ, फिर इस लेप को आहिस्ता-आहिस्ता त्वचा पर मलें, सूखने पर ठंडे-ठंडे पानी से स्नान कर लें। शरीर की त्वचा नर्म, मुलायम और गुलाबी आभायुक्त दिखाई देगी। गर्मियों में गुलाब के फूलों का रस चेहरे पर मलने से चेहरे पर ठंडी-ठंडी ताजगी बनी रहती है।
केवड़ा : यूँ तो यह एक बेहतरीन खुशबू का फूल है। इसके इत्र की तासीर ग्रीष्म में तन को शीतलता प्रदान करती है। केवड़े के पानी से स्नान करने से शरीर की जलन व पसीने की दुर्गंध से भी छुटकारा मिलता है। गर्मियों में नित्य केवड़ायुक्त पानी से स्नान करने से शरीर में शीतलता बनी रहती है।
गेंदा : इसके पीले केसरिया फूल त्वचा को निखारने में विशेष उपयोगी है। स्किन टॉनिक बनाने के लिए 5 गेंदे के ताजे फूलों की पत्तियों को एक प्याला पानी में भिगो दें। 3 घंटे उपरांत पत्तियों को पानी में मसलकर छान लें। इस पानी का लेप त्वचा पर करें। थोड़ी देर बाद स्नान कर लें। त्वचा का सौन्दर्य तो निखरेगा ही, ठंडक का एहसास भी होगा।
एल्डर फ्लॉवर : इस फ्लॉवर को आधा प्याला पानी में रखने के उपरांत, प्याले के पानी को चेहरे पर मलें। त्वचा दाग धब्बोंरहित कोमल बनेगी।
ब्ल्यू विज हैजल : कुदरत का यह फूल भी सौन्दर्य निखारने में माहिर है। इस फूल में छिपे प्राकृतिक गुण त्वचा में कसाव भी लाते हैं व शीतलता भी प्रदान करते हैं। इसकी पत्तियाँ एक कप पानी में भिगों दें। 30 मिनट बाद पत्तियों को अच्छी तरह मसलकर छान लें। इसका लेप त्वचा पर करें। सौन्दर्य तो निखरेगा ही, ठंडी-ठंडी ताजगी का अनुभव भी होगा।
कमल : कमल के फूलों को धारण करने से शरीर शीतल रहता है। फोड़े-फुँसी आदि शांत होते हैं। शरीर पर विष का कुप्रभाव कम होता है। गुलाब, बेला, जूही आदि के अलंकरण हृदय को प्रिय होते हैं। इससे मोटापा कम होता है। चंपा, चमेली, मौलसरी आदि के प्रयोग से शरीर दाह की कमी तथा रक्त विकार दूर होते हैं और मन प्रसन्न रहता है।
पफी आईज और डार्क सर्कल्स दूर करें
Shweta Pandey | 9:22 PM |
चमकती आँखों के लिए
,
डार्क सर्कल्स
,
पफी आईज
,
फिटनेस फार्मूला
,
सेहत के सरल टिप्स
अपने खाने में फल और सब्जियों खासतौर पर गोभी, पालक और हरी-पत्तेदार सब्जियों की मात्रा बढ़ाएँ। ताँबे की प्रधानता वाले तत्व जैसे तिल, मशरूम, जौ और काजू को खाने में स्थान दें, ताकि आपके शरीर का एंटीऑक्सिडेंट मैकेनिज्म तेज हो, जो डार्क सर्कल से लड़े। हर दिन के खाने में नमक की मात्रा 2 से 3 टेबल स्पून तक कम करें और शकर को पूरी तरह से बंद कर दें।
ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने के लिए हर दिन ब्रिस्क वॉक करें। ये सब फूली हुई आँखों की समस्या को दूर करने में जादुई असर करेगा। हर दिन कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पिएँ क्योंकि रूखापन भी डार्क सर्कल्स पैदा करता है।
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बहुत ज्यादा काम या नया काम ही तनाव नहीं देता। कई बार वही पुराना काम व नए चुनौतीपूर्ण काम का अभाव भी हमें टेंशन दे सकता है! अगर आप लगातार एक जैसा काम करते हुए बोर हो रहे हैं तो संभल जाइए यह आपकी सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।
बोर होने के नुकसान : -
1 लगातार बोर होते रहने से जीवन में नीरसता आ जाती है, इससे चेहरे की त्वचा अपनी चमक खोने लगती है।
2 जीवन के प्रति उत्साह ना रहने से चिड़चिड़ापन और उद्वीग्नता आ जाती है।
3 आँखें बुझी-बुझी लगती है।
4 छोटे-छोटे रोग शरीर में घर बनाने लगते हैं।
5 सबसे पहला असर प्राकृतिक भूख पर पड़ता है। भोजन के प्रति अरुचि होने लगती है।
क्या करें :- बोरियत से बचने के लिए अपनी रुचि के अनुरूप कार्यों के लिए समय निकालें। कुछ समय योग, भक्ति या व्यायाम के लिए निकालें। मित्रों एवं परिवार वालों के साथ समय बिताएँ। प्राकृतिक स्थानों पर जाएँ। ऐसी पुस्तकें पढ़ें, जिनमें आपकी रुचि हो। मनपसंद संगीत सुनें। सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएँ।
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बोर होने के नुकसान : -
1 लगातार बोर होते रहने से जीवन में नीरसता आ जाती है, इससे चेहरे की त्वचा अपनी चमक खोने लगती है।
2 जीवन के प्रति उत्साह ना रहने से चिड़चिड़ापन और उद्वीग्नता आ जाती है।
3 आँखें बुझी-बुझी लगती है।
4 छोटे-छोटे रोग शरीर में घर बनाने लगते हैं।
5 सबसे पहला असर प्राकृतिक भूख पर पड़ता है। भोजन के प्रति अरुचि होने लगती है।
क्या करें :- बोरियत से बचने के लिए अपनी रुचि के अनुरूप कार्यों के लिए समय निकालें। कुछ समय योग, भक्ति या व्यायाम के लिए निकालें। मित्रों एवं परिवार वालों के साथ समय बिताएँ। प्राकृतिक स्थानों पर जाएँ। ऐसी पुस्तकें पढ़ें, जिनमें आपकी रुचि हो। मनपसंद संगीत सुनें। सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएँ।
लाइफ स्टाइल बदलने से हेल्थ की कई प्रॉब्लम्स अपने आप चली जाती हैं। मसलन यदि आप देर तक सोने के आदी थे और अब जल्दी उठने लगे हैं तो डेफिनेटली आपकी हेल्थ में पॉजिटीव इम्प्रूवमेंट होगा। इसलिए दवाएँ छोड़ना हों तो दिनचर्या बदल डालिए।
हमें बहुत सारी महँगी दवाइयाँ खाकर भी अपनी बीमारी से मुक्ति नहीं मिल पाती। क्या आपकी बीमारी का इलाज सिर्फ दवाइयाँ हैं? नित नई ऊँचाइयों को छूने की अंधी दौड़ में अस्त-व्यस्त जीवन व अत्यधिक तनाव ही हमारे हिस्से में आता है। परिणामस्वरूप कार्यक्षमता घट जाती है। बीमारियाँ, मानसिक विकार, निराशा व खीज व्यक्ति को घेरने लगते हैं।
इन बीमारियों के लिए जिम्मेदार हमारी जीवनशैली है। ये नतीजा है, स्वास्थ्य व जीवनशैली के बीच के असंतुलन का, परंतु हम बीमारी की जड़ को देखे बिना बस दवाइयाँ खाने पर विश्वास करते हैं। क्या कभी आपने सोचा है कि उच्च-रक्तचाप, मधुमेह, दिल की बीमारियाँ, हायपरकोलेस्ट्रोलेमिया मोटापा या जोड़ों का दर्द आदि इन बीमारियों की जड़ क्या है? उदाहरण के लिए यदि आप उच्च-रक्तचाप से पीड़ित हैं और रोज दवाइयाँ खा रहे हैं। यह आपके लिए हानिकारक है। इसकी शुरुआत कहाँ से होती है?
अनिद्रा, मोटापा, ध्रूमपान, शराब का सेवन, व्यायाम की कमी, तनाव व अनियमित तथा असंतुलित खानपान की आदतें, इसके लिए जिम्मेदार कारण हैं। हम आनुवंशिक कारणों को नहीं बदल सकते, परंतु बाकी के सारे कारणों का इलाज तो हमारे हाथ में है।
हमें बहुत सारी महँगी दवाइयाँ खाकर भी अपनी बीमारी से मुक्ति नहीं मिल पाती। क्या आपकी बीमारी का इलाज सिर्फ दवाइयाँ हैं? नित नई ऊँचाइयों को छूने की अंधी दौड़ में अस्त-व्यस्त जीवन व अत्यधिक तनाव ही हमारे हिस्से में आता है। परिणामस्वरूप कार्यक्षमता घट जाती है। बीमारियाँ, मानसिक विकार, निराशा व खीज व्यक्ति को घेरने लगते हैं।
इन बीमारियों के लिए जिम्मेदार हमारी जीवनशैली है। ये नतीजा है, स्वास्थ्य व जीवनशैली के बीच के असंतुलन का, परंतु हम बीमारी की जड़ को देखे बिना बस दवाइयाँ खाने पर विश्वास करते हैं। क्या कभी आपने सोचा है कि उच्च-रक्तचाप, मधुमेह, दिल की बीमारियाँ, हायपरकोलेस्ट्रोलेमिया मोटापा या जोड़ों का दर्द आदि इन बीमारियों की जड़ क्या है? उदाहरण के लिए यदि आप उच्च-रक्तचाप से पीड़ित हैं और रोज दवाइयाँ खा रहे हैं। यह आपके लिए हानिकारक है। इसकी शुरुआत कहाँ से होती है?
अनिद्रा, मोटापा, ध्रूमपान, शराब का सेवन, व्यायाम की कमी, तनाव व अनियमित तथा असंतुलित खानपान की आदतें, इसके लिए जिम्मेदार कारण हैं। हम आनुवंशिक कारणों को नहीं बदल सकते, परंतु बाकी के सारे कारणों का इलाज तो हमारे हाथ में है।
नियमित व्यायाम : 30-45 मिनट कोई भी एरोबिक एक्टिविटी करें। स्विमिंग, जॉगिंग, डांस, एक्सरसाइज, ब्रिस्क वॉक में से कोई भी एक्टिविटी आप कर सकते हैं।
पानी पिएँ - पानी शरीर में विषैले पदार्थ बाहर निकालने में मदद करता है। यह शरीर में पानी का स्तर बनाए रखने के साथ-साथ त्वचा को भी युवा एवं चिकनी बनाए रखता है। शरीर के तापमान को भी नियंत्रित करता है। कभी भी प्यास लगने का इंतजार न करें।
नियमित ब्रेकफास्ट करें- यह दिन का सबसे महत्वपूर्ण आहार है। यह आपको दिनभर कार्य करने की ऊर्जा प्रदान करने के साथ-साथ आपकी एकाग्रता एवं याददाश्त बढ़ाता है। मांसपेशियों के तालमेल को बढ़ाता है। टाइप-2 डायबिटीज व दिल के रोगों के जोखिम को कम करता है। अपने नाश्ते में गेहूँ, जुवार, बाजरा, रागी, ब्राउन राइस, दलिया, कॉर्न फ्लेक्स, व्हीट फ्लेक्स या कोई भी एक अनाज शामिल करें।
दूध व उससे बने पदार्थ : रोज कम से कम 1 गिलास दूध पिएँ। अपने सुबह और शाम के भोजन में दही को शामिल करें। छाछ, पनीर इन्हें भी आहार में शामिल करें। छाछ में दूध की तुलना में कम वसा होती है। दही प्रोटीन व कैल्शियम का अच्छा स्रोत है।
सब्जियाँ खाएँ : अपने आहार में सभी सब्जियों को शामिल करें। ये विटामिंस, मिनरल्स, एन्टीऑक्सीडेंट्स के सबसे अच्छे स्रोत हैं।
अंकुरित अन्न : शाकाहारी भोजन में प्रोटीन का सबसे अच्छा स्रोत है अंकुरित अनाज, इसे साफ करके खाना चाहिए।
पेय : चाय, कॉफी व शकर का प्रयोग सीमित मात्रा में करें। ये सभी मूत्रवर्धक होते हैं तथा अत्यधिक मात्रा में लेने पर शरीर में पानी की कमी होने लगती है।
ध्यान करें : दिनभर में 15-20 मिनट का समय स्वयं के साथ बिताएँ। ध्यान करें, अपने किसी भी शौक को कम से कम 15-20 मिनट का वक्त दें। ये आपके तनाव को खत्म कर देगा। आप ऊर्जावान महसूस करेंगे।
जीवनशैली बदलें : प्रोफेशनल और सोशल लाइफ के बीच संतुलन स्थापित करने की जरूरत है। इसके लिए जीवनशैली में परिवर्तन लाएँ। अपनी क्षमताओं का न केवल अधिकतम उपयोग करें बल्कि उनमें निरंतर बढ़ोतरी करें। जीवनभर सुखी और स्वस्थ रह सकें, इस पर जरूर विचार करें।
नींद- कम से कम 7-8 घंटे की नींद लें। यह आपका प्राकृतिक टॉनिक है। आपकी आँखों के नीचे काले घेरों का एक कारण भरपूर नींद न लेना है। अनिद्रा के कारण तनाव, काले घेरे, उच्च रक्तचाप आदि बीमारियाँ होती हैं।
इसमें कोई दो राय नहीं है कि एक संतुलित डाइट न केवल आपके सेहत के लिए लाभप्रद है बल्कि यह आपके स्किन के लिए फायदेमंद है। एक तनावपूर्ण जिंदगी और एक उचित डाइट की कमी के कारण आपकी त्वचा रूखी हो जाती है और कई त्वचा की परेशानियाँ उत्पन्न होने लगती हैं जैसे रैशेज, रूखापन, आँखों के नीचे काले घेरे और मुँहासे आदि।
वैसे अन्य कई कारण भी हैं जो हमारी त्वचा को नुकसान पहुँचाते हैं। हार्मोनल परिवर्तन, जेनेटिक समस्या स्किन को प्रभावित करती हैं।
लेकिन 70 प्रतिशत से अधिक परिस्थितियों में त्वचा रोग के लिए गलत डाइट ही जिम्मेदार होता है। वैसे तो विभिन्न प्रकार की त्वचा के लिए विभिन्न डाइट्स की जरूरत होती है। लेकिन एक स्वस्थ त्वचा के लिए आवश्यक चीजों की सूची निम्नलिखित हैः
* आपको अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए। क्योंकि पानी ही स्किन के लिए एक सर्वश्रेष्ठ औषधि है। यह न केवल आपको रिफ्रेश करता है बल्कि आपकी त्वचा को एक अद्भूत चमक प्रदान करता है।
* जिस तरह हमारे शरीर को ऑक्सीजन की जरूरत है ठीक उसी तरह हमारे स्किन के लिए विटामिन की आवश्यकता है। कुछ विटामिन के नाम निम्नलिखित है जो आपकी त्वचा की चमक को बरकरार रखने में मदद करता है।

1. विटामिन सी : यह सभी रसदार फलों में पाया जाता है जैसे संतरा, नींबू, मौसंबी
2. विटामिन ए : इसके प्रमुख स्रोत हैं- पपीता, संतरा, एगयॉर्क
3. विटामिन बी : यह फलों सहित सभी पत्तेदार सब्जियों में पाया जाता है।
4. विटामिन ई : यह मूँगफली, और अन्य आइल सीड्स में पाया जाता है।
एक स्वस्थ स्किन को बनाए रखना इतना मुश्किल नहीं है। बस जरूरत है तो स्किन का ध्यान रखने की, और अपने खाने में सभी जरूरी तत्वों को शामिल करने की। आप एक डाइट स्पेशलिस्ट के पास जा सकते हैं और अपने लिए एक संतुलित डाइट चार्ट भी बनवा सकते हैं।
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वैसे अन्य कई कारण भी हैं जो हमारी त्वचा को नुकसान पहुँचाते हैं। हार्मोनल परिवर्तन, जेनेटिक समस्या स्किन को प्रभावित करती हैं।
लेकिन 70 प्रतिशत से अधिक परिस्थितियों में त्वचा रोग के लिए गलत डाइट ही जिम्मेदार होता है। वैसे तो विभिन्न प्रकार की त्वचा के लिए विभिन्न डाइट्स की जरूरत होती है। लेकिन एक स्वस्थ त्वचा के लिए आवश्यक चीजों की सूची निम्नलिखित हैः
* आपको अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए। क्योंकि पानी ही स्किन के लिए एक सर्वश्रेष्ठ औषधि है। यह न केवल आपको रिफ्रेश करता है बल्कि आपकी त्वचा को एक अद्भूत चमक प्रदान करता है।
* जिस तरह हमारे शरीर को ऑक्सीजन की जरूरत है ठीक उसी तरह हमारे स्किन के लिए विटामिन की आवश्यकता है। कुछ विटामिन के नाम निम्नलिखित है जो आपकी त्वचा की चमक को बरकरार रखने में मदद करता है।
2. विटामिन ए : इसके प्रमुख स्रोत हैं- पपीता, संतरा, एगयॉर्क
3. विटामिन बी : यह फलों सहित सभी पत्तेदार सब्जियों में पाया जाता है।
4. विटामिन ई : यह मूँगफली, और अन्य आइल सीड्स में पाया जाता है।
एक स्वस्थ स्किन को बनाए रखना इतना मुश्किल नहीं है। बस जरूरत है तो स्किन का ध्यान रखने की, और अपने खाने में सभी जरूरी तत्वों को शामिल करने की। आप एक डाइट स्पेशलिस्ट के पास जा सकते हैं और अपने लिए एक संतुलित डाइट चार्ट भी बनवा सकते हैं।
यह मौसम हेल्थ और स्किन केयर माँगता है। इस मौसम में ब्यूटी को बनाए रखने के लिए करें बस थोड़ा-सा जतन ताकि बढ़ जाए देखने वालों की जलन। छोटे-छोटे घरेलू टिप्स आजमाएँ और खिल जाएँ फूलों-सी :
प्यार करें चेहरे से : चेहरे की त्वचा के पोषण के लिए गाजर को कद्दूकस करके अच्छी तरह से पीस लें। इसमें जरा सा शहद मिलाकर त्वचा पर लगाएँ। इससे त्वचा को भरपूर पोषण मिलता है क्योंकि गाजर में विटामिन-ए पर्याप्त मात्रा में होता है। चेहरे की त्वचा के दाग-धब्बे हटाने के लिए पपीते के गूदे का पेस्ट बनाकर पूरे चेहरे पर मलें। दस मिनट बाद चेहरा धो लें। इसे कुछ महीने तक इस्तेमाल करने पर झाँइयाँ और कालापन भी मिट जाता है,साथ ही दाग-धब्बे भी दूर हो जाते हैं।
नाजुक लबों के लिए : होंठों के सौंदर्य और कोमलता बरकरार रखने के लिए गुलाब की हरी पत्तियों में थोड़ा दूध मिलाकर अच्छी तरह से बारीक पीस लें। इस पेस्ट को होंठों पर और चेहरे पर भी लगाएँ। इससे होंठों पर निखार आ जाएगा और चेहरे की रंगत भी काबिले तारीफ हो जाएगी।
दमकती स्किन के लिए : त्वचा को सुंदर बनाने के लिए संतरे के छिलकों के पाउडर में एक चम्मच दूध मिलाकर चेहरे पर लगाएँ। कुछ सप्ताह के प्रयोग से त्वचा निखर उठती हैं। खीरे के रस में नींबू का रस और गुलाब जल मिलाकर चेहरे पर लगाएँ। इससे भी त्वचा सुंदर बनती है।
ये है होम सनस्क्रीन : लाल चंदन, मुलहठी, अनंत मूल, खस, हल्दी- ये सब चीजें बराबर मात्रा में लेकर महीन पावडर बना लें। इसमें से एक चम्मच पावडर को रात के समय शहद या कच्चे दूध में मिलाकर पेस्ट बनाएँ और चेहरे एवं गर्दन पर लगाएँ। सुबह गुनगुने पानी से चेहरा धो दें। यह उपाय रोजाना करने से चेहरे की त्वचा की धूप से रक्षा होती है।
साँवली-सलोनी : साँवली त्वचा को निखरी रंगत देने के लिए लोध, मजीठ, हल्दी, चिरौंजी 50-50 ग्रा. लेकर पावडर बना लें। अब एक शीशी गुलाब जल, 250 ग्रा. शहद या एक-एक चम्मच सब चीजों को मिलाकर इसमें 6 चम्मच शहद मिलाएँ और नींबू का रस तथा गुलाब जल डालकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को चेहरे, गरदन, बाँहों पर लगाएँ और एक घंटे के बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो दें। ऐसा सप्ताह में दो बार करने से चेहरे का साँवलापन दूर होकर रंग गोरा हो जाता है।
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प्यार करें चेहरे से : चेहरे की त्वचा के पोषण के लिए गाजर को कद्दूकस करके अच्छी तरह से पीस लें। इसमें जरा सा शहद मिलाकर त्वचा पर लगाएँ। इससे त्वचा को भरपूर पोषण मिलता है क्योंकि गाजर में विटामिन-ए पर्याप्त मात्रा में होता है। चेहरे की त्वचा के दाग-धब्बे हटाने के लिए पपीते के गूदे का पेस्ट बनाकर पूरे चेहरे पर मलें। दस मिनट बाद चेहरा धो लें। इसे कुछ महीने तक इस्तेमाल करने पर झाँइयाँ और कालापन भी मिट जाता है,साथ ही दाग-धब्बे भी दूर हो जाते हैं।
नाजुक लबों के लिए : होंठों के सौंदर्य और कोमलता बरकरार रखने के लिए गुलाब की हरी पत्तियों में थोड़ा दूध मिलाकर अच्छी तरह से बारीक पीस लें। इस पेस्ट को होंठों पर और चेहरे पर भी लगाएँ। इससे होंठों पर निखार आ जाएगा और चेहरे की रंगत भी काबिले तारीफ हो जाएगी।
ये है होम सनस्क्रीन : लाल चंदन, मुलहठी, अनंत मूल, खस, हल्दी- ये सब चीजें बराबर मात्रा में लेकर महीन पावडर बना लें। इसमें से एक चम्मच पावडर को रात के समय शहद या कच्चे दूध में मिलाकर पेस्ट बनाएँ और चेहरे एवं गर्दन पर लगाएँ। सुबह गुनगुने पानी से चेहरा धो दें। यह उपाय रोजाना करने से चेहरे की त्वचा की धूप से रक्षा होती है।
साँवली-सलोनी : साँवली त्वचा को निखरी रंगत देने के लिए लोध, मजीठ, हल्दी, चिरौंजी 50-50 ग्रा. लेकर पावडर बना लें। अब एक शीशी गुलाब जल, 250 ग्रा. शहद या एक-एक चम्मच सब चीजों को मिलाकर इसमें 6 चम्मच शहद मिलाएँ और नींबू का रस तथा गुलाब जल डालकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को चेहरे, गरदन, बाँहों पर लगाएँ और एक घंटे के बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो दें। ऐसा सप्ताह में दो बार करने से चेहरे का साँवलापन दूर होकर रंग गोरा हो जाता है।
गर्मी की दस्तक के साथ ही सेहत की परेशानियाँ बढ़ने लगती है। लेकिन यही मौसम खिलने और खुल कर जीने का भी होता है। हेल्थ की हल्की-फुल्की बातों का रखें ख्याल और लुत्फ उठाएँ गर्मी का बेशुमार:
* त्वचा को रूखेपन से बचाने के लिए पानी खूब पीएँ। दिन में कई बार ठंडे पानी से चेहरा धोएँ, लेकिन साबुन का प्रयोग हर बार न करें।
* चेहरे पर दाग-धब्बे पड़ जाते हैं, उन्हें मिटाने के लिए नींबू के ऐ छिलके पर चीनी के कुछ दाने डालकर उसे तब तक हलके हाथ से त्वचा पर मलते रहें, जब तक चीनी घुल नहीं जाती। यह तरीका काली कोहनियों व हाथ-पैरों की त्वचा पर आजमाएँ।
* कुनकुने पानी में शहद डालकर सुबह सेवन करने से हाजमा अच्छा रहता है व वजन भी संतुलित रहता है।
* सुबह उठने पर आँखें सूजी हों तो पानी में थोड़ी चाय की पत्ती उबालें फिर उसे छानकर ठंडा कर रूई के फाहे से आँखों पर लगाएँ, सूजन फौरन खत्म हो जाएगी।
* टमाटर का टुकड़ा लेकर चेहरे पर हलके-हलके मसाज करें, चेहरे की सारी गंदगी साफ हो जाएगी।
* भोजन में ज्यादा तेज मिर्च-मसाला खाने से पसीना दुर्गंधमय हो जाता है, इससे बचने के लिए नहाते समय पानी में थोड़ा यूडी कोलोन या गुलाबजल डालकर नहाएँ। कपड़े से पसीने की दुर्गंध हटाने के लिए धोने के बाद कपड़ों को सिरका मिले पानी से निकालकर सुखाएँ।
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* त्वचा को रूखेपन से बचाने के लिए पानी खूब पीएँ। दिन में कई बार ठंडे पानी से चेहरा धोएँ, लेकिन साबुन का प्रयोग हर बार न करें।
* चेहरे पर दाग-धब्बे पड़ जाते हैं, उन्हें मिटाने के लिए नींबू के ऐ छिलके पर चीनी के कुछ दाने डालकर उसे तब तक हलके हाथ से त्वचा पर मलते रहें, जब तक चीनी घुल नहीं जाती। यह तरीका काली कोहनियों व हाथ-पैरों की त्वचा पर आजमाएँ।
* कुनकुने पानी में शहद डालकर सुबह सेवन करने से हाजमा अच्छा रहता है व वजन भी संतुलित रहता है।
* टमाटर का टुकड़ा लेकर चेहरे पर हलके-हलके मसाज करें, चेहरे की सारी गंदगी साफ हो जाएगी।
* भोजन में ज्यादा तेज मिर्च-मसाला खाने से पसीना दुर्गंधमय हो जाता है, इससे बचने के लिए नहाते समय पानी में थोड़ा यूडी कोलोन या गुलाबजल डालकर नहाएँ। कपड़े से पसीने की दुर्गंध हटाने के लिए धोने के बाद कपड़ों को सिरका मिले पानी से निकालकर सुखाएँ।
सेक्स कई रोगों की दवा है
Shweta Pandey | 4:02 AM |
अचूक उपाय
,
इलाज
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फिटनेस फार्मूला
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सेक्स
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सेहत के सरल टिप्स
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हेल्थ व ब्यूटी
आप शीर्षक पढ़कर चौंक गए होंगे कि भला सेक्स रोगों की दवा हो सकता है? इसमें चौंकने की कोई बात नहीं है। डॉक्टरों व वैज्ञानिकों ने शोध करके यह पता लगाया है कि सेक्स अनेक रोगों की दवा भी है। जहाँ जीवन में सेक्स एक-दूजे के बीच सुख, आनंद, अपनापन लाता है, वहीं एक-दूजे की हेल्थ व ब्यूटी को भी बनाए रखता है। सेक्स से शरीर में अनेक प्रकार के हार्मोन उत्पन्न होते हैं, जो शरीर के स्वास्थ्य एवं सौंदर्य को बनाए रखने में सहायक होते हैं। सेक्स से शरीर में उत्पन्न एस्ट्रोजन हार्मोन 'ऑस्टियोपोरोसिस' नामक बीमारी नहीं होने देता है। सेक्स से एंडोर्फिन हार्मोन की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे स्किन सुंदर, चिकनी व चमकदार बनती है। एस्ट्रोजन हार्मोन शरीर के लिए एक चमत्कार है, जो एक अनोखे सुख की अनुभूति कराता है।
सफल व नियमित सेक्स करने वाले मैरिड कपल अधिक स्वस्थ देखे गए हैं। उनका सौंदर्य भी लंबी उम्र तक बना रहता है। उनमें उत्तेजना, उत्साह, उमंग और आत्मविश्वास भी अधिक होता है। सेक्स से परहेज करने वाले शर्म, संकोच, अपराधबोध व तनाव से पीड़ित रहते हैं। दिमाग को तरोताजा रखने व तनाव को दूर करने के लिए नियमित सेक्स एक अच्छा उपाय है। सेक्स के समय फेरोमोंस नामक रसायन शरीर में एक प्रकार की गंध उत्पन्न करता है, जिसे आप सेक्स परफ्यूम भी कह सकते हैं। यह सेक्स परफ्यूम दिल व दिमाग को असाधारण सुख व शांति देता है। सेक्स हृदय रोग, मानसिक तनाव, रक्तचाप और दिल के दौरे से दूर रखता है। सेक्स से दूर भागने वाले इन रोगों से अधिक पीड़ित रहते हैं।
सफल व नियमित सेक्स करने वाले मैरिड कपल अधिक स्वस्थ देखे गए हैं। उनका सौंदर्य भी लंबी उम्र तक बना रहता है। उनमें उत्तेजना, उत्साह, उमंग और आत्मविश्वास भी अधिक होता है। सेक्स से परहेज करने वाले शर्म, संकोच, अपराधबोध व तनाव से पीड़ित रहते हैं। दिमाग को तरोताजा रखने व तनाव को दूर करने के लिए नियमित सेक्स एक अच्छा उपाय है। सेक्स के समय फेरोमोंस नामक रसायन शरीर में एक प्रकार की गंध उत्पन्न करता है, जिसे आप सेक्स परफ्यूम भी कह सकते हैं। यह सेक्स परफ्यूम दिल व दिमाग को असाधारण सुख व शांति देता है। सेक्स हृदय रोग, मानसिक तनाव, रक्तचाप और दिल के दौरे से दूर रखता है। सेक्स से दूर भागने वाले इन रोगों से अधिक पीड़ित रहते हैं।
सेक्स एक प्रकार का व्यायाम भी है। इसके लिए खास किस्म के सूट, शू या महँगी एक्सरसाइज सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। जरूरत होती है बस शयनकक्ष का दरवाजा बंद करने की। सेक्स व्यायाम शरीर की मांसपेशियों के खिंचाव को दूर करता है और शरीर को लचीला बनाता है। एक बार की संभोग क्रिया, किसी थका देने वाले व्यायाम या तैराकी के 10-20 चक्करों से अधिक असरदार होती है। सेक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार मोटापा दूर करने के लिए सेक्स काफी सहायक सिद्ध होता है।
सेक्स से शारीरिक ऊर्जा खर्च होती है, जिससे कि चर्बी घटती है। एक बार की संभोग क्रिया में 500 से 1000 कैलोरी ऊर्जा खर्च होती है। सेक्स के समय लिए गए चुंबन भी मोटापा दूर करने में सहायक सिद्ध होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सेक्स के समय लिए गए एक चुंबन से लगभग 9 कैलोरी ऊर्जा खर्च होती है। इस तरह 390 बार चुंबन लेने से 1/2 किलो वजन घट सकता है।
